43 thoughts on “Meo Muslims- The History of Brotherhood in Mewat

  • मेव और मीणा एक ही मूल के पाल और गोत्र समान है इस संबंध मे मेरेद्वारा अनेक साक्ष्य खोजे गये है
    मेव और मीणा एक हा फिर होगा न्याला
    शशीबदनी का ब्याह मे भिड गया मतवाला ।

  • TAYYAB HUSAIN JINDABAD JAAKR HUSAAN JINDABAD YASEN MEO JINDABAD AAL MEWAT JINDABAD AAL MEWAT JINDABAD MEWAT JINDABAD MEWAT JINDABAD AAL MEWATI JINDABAD MEO MEO DANGAL JINDABAD

  • Koi mujhe raja hassan.khanzada mewati ke bare main batyga agar main.pakistan se hun our mery dada nuh city ke pas colgown se the agar koi meri.help karde tu thanx

  • 💃🏻❣🏃🏻♈ℹJay…✍🏻

    Mewat ke बारे में इतना मत सोचना ,

    Mewat दिल में आता h , समज में नही । Ok

  • मेव समाज का इतना ज़बरदस्त इतिहास है. आज हमारा वही मेव समाज कहां पहुंच गया है. आजादी के 65 सालों बाद भी हमारा समाज उसी अशिक्षिता, बेरोज़गारी, पिछडापन, गरीबी और अंधविश्वासों के हालात  में अपनी जिंदगी बसर कर रहा है, जो हालात आज़ादी के पहले थे. बल्कि सच्चाई तो यह है कि आज के हालात उस समय से भी बदतर हैं.

    और शायद इन सबके लिए ज़िम्मेदार हम ही हैं. हमारे समाज का विकास तब ही संभव हैं, जब हमारे मेव समाज के लोग पुराने विचारों को छोड़कर नए सिरे से जिंदगी जीना शुरू करेंगें.  विकास तब ही मुमकिन होगा जब हम अपने समाज के बच्चों को दर-दर भटकने देने के बजाये उन्हें तालीम हासिल करने के मक़सद से स्कूलों में भेजेंगे.

    और हाँ! विकास सरकार के ज़रिये भी तब ही माना जायेगा जब हमारे इलाके के हर गांव में स्कूल खोले जायेंगे और हर बच्चा सुबह-सुबह मजदूरी पर जाने के बजाये स्कूल जाता हुआ नज़र आएगा. और ये सब तब ही मुमकिन होगा,   जब हमारे समाज को चलाने वाले नेता हमारे समाज के भोले व अशिक्षित लोगों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना छोड़कर उनकी तरफ इंसानियत की निगाहों से देखना शुरू करेंगे. और उनके हक़ उन तक सही मायनों में पहुचाना शुरू करेंगे, या फिर हमारे समाज को ही अपने  अंदर अपने लिए कोई काबिल रहनुमा तलाशना होगा.

    हमारे समाज के लोगों के भोलेपन और मासूमियत का आलम तो ये है कि अगर आज हमारे समाज के लोगों को कोई मामूली सा काम भी सरकार करते हुए नज़र आती है तो वो उसको अपना हक़ समझने के बजाये उनका एहसान समझते हैं. और बिना सोचे-समझे उनका एहसानमंद होने के नाते अपना अगला कौमी रहनुमा फिर से उसे ही चुन बैठते !

  • Hazrat Ji Maulana Ilyas Kandhalvi(RH)
    Mewat ke hi The Jinhone Dawat o Tabligh ka Kaam Shuru Kiya Tha ALHAMDULILLAH

  • These meos were actually from my Meena caste. After the independence of India rhymes asked us to come back to hindusim to become Meena again.
    But our Panchs or Sarpanchs(leaders) refused to take them back

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